Saturday, July 27, 2019

बालकथा: मित्रता के फूल

बाल कथा
मित्रता के फूल
ब्रजेश कानूनगो

अमित के पापा ने जब नए घर में रहना शुरू किया तो अमित के सारे पुराने साथी छूट गए. नई  जगह वह अपने आप को बेहद अकेला महसूस करने लगा. घर में भी वह सबसे छोटा था. नया मकान बिल्कुल नई बनी कॉलोनी में था, इसलिए आस-पड़ोस के क्वार्टर भी खाली पड़े थे.

छुट्टियों में खेलता भी तो भला किसके साथ?  वह दिन भर बेचैन रहता और शाम का इंतजार करता ताकि उसके पापा जब दफ्तर से लौटे हैं तो वह उनके साथ कुछ देर बैदामिन्टन खेल सके.

अमित की मम्मी ने जब अपने छोटे से आंगन में कुछ पौधे लगाए तो अमित खुश हो गया. वह सुबह शाम पौधों को पानी पिलाता, उनकी देखभाल करने में उसका मन लगा रहता और रोज फूलों के खिलने का इंतजार करता.
पौधे जब बड़े हुए तो एक  दिन कुछ आवारा पशु उसके आंगन में प्रवेश कर गए और हरे हरे पौधों को चर गए. अमित को बहुत दुख हुआ. उस के आंगन के आस-पास कांटेदार तारों की बागड नहीं होने से पौधों के कुछ बड़े होते ही आवारा पशुओं उन्हें नष्ट कर डालते.

उन्हीं दिनों अमित के पड़ोस वाले क्वाटर में एक कुत्तिया ने चार सलोने पिल्लों को जन्म दिया. अमित को देख कर बहुत खुशी हुई. वह उन्हें गोद में उठा लेता और प्यार करता. अपने हिस्से के दूध में से वह आधा उन्हें पिला देता.
उनमें से एक पिल्ला तो उसे बहुत ही प्यारा लगता था. काले बालों वाले गबरु पिल्ले के माथे पर सफेद तिलक था. पिल्ले  के थोड़ा बड़ा होने पर अमित अपनी मम्मी से पूछ कर उसे घर ले आया. अमित का पूरा दिन अब पिल्ले के साथ खेलने में उसे दुलारने में निकल जाता. वह उसे नहलाता, कंघी करता, बगीचे में घूमता. दोपहर को अपने कमरे में बैठा कर उसे ट्रांजिस्टर सुनाता. शाम को उसके साथ गेम खेलता. और रात को दोनों टीवी  देखते. अमित ने उसका नाम भी रख दिया बब्बर.

जितना अमित बब्बर को प्यार करता, उतना ही बब्बर भी अमित को चाहता था. दोनों एक दूसरे के पक्के मित्र बन गए. एक दिन जब अमित नहा रहा था, उसने बब्बर के भौंकने की आवाज सुनी. वह फौरन बाथरूम से निकला और दौड़कर आंगन में आ गया. उसने देखा बब्बर आवारा पशुओं पर भौंक-भौंक कर उन्हें पौधों से दूर भगा रहा था. अमित और बब्बर ने पशुओं को खदेड़ कर बाहर निकाल दिया.
अब अमित प्रतिदिन अपनी बगिया के पौधों को सींचता और बब्बर उनकी रक्षा करता. कुछ ही दिनों में बगिया में अमित और बब्बर की मित्रता के सतरंगे फूल खिल उठे, जहां रंग बिरंगी तितलियां आती थी, भौरों का मधुर गायन होता था और फूलों की सुगंध मन को प्रसन्न कर देती थी.

ब्रजेश कानूनगो

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