बालकथा
लोहे
के पंजे वाला बच्चा
ब्रजेश
कानूनगो
चुन्नू दौड़ता हुआ अपने घर में घुसा उसके एक पैर के पंजे से खून बह रहा था।उसको पता ही नहीं चला कि उसके पैर में चोट लगी है और खून बह कर फर्श को भी लाल कर रहा है।
चुन्नू की मम्मी ने जैसे ही फर्ज की ओर देखा वह चौंक पड़ी। 'इसका मतलब चुन्नू को आज भी चोट लगी है'। वह बड़बड़ाती हुई चुन्नू के कमरे में पहुंची। चुन्नू जल्दी-जल्दी अलमारी से गेंद और बल्ला निकाल रहा था।
'चुन्नू तुम्हारे पैर में चोट लगी है और तुम्हें पता ही नहीं है।' चुन्नू की मम्मी ने घबराकर चुन्नू से कहा।
'अरे!' आश्चर्य से चुन्नू अपना पंजा देखने लगा। लाल लाल खून देखकर उसे रोना आ गया।
चुन्नू की मम्मी ने चुन्नू के पांव को देखा। तलवे में कांच चुभने का स्पष्ट निशान था और खून निकल रहा था। चुन्नू की मम्मी ने तुरंत दवा से उसका घाव धोया और मरहमपट्टी कर दी।
चुन्नू को घर से बाहर खेलने जाने से मना कर दिया गया। चुन्नू को जब तब पैरों में चोट लगती रहती थी और उसकी मम्मी उसे कईबार समझाकर परेशान हो चुकी थी कि खेलते घूमते समय कैनवास के जूते पहनकर या स्लीपर पैरों में डालकर बाहर निकला करे। लेकिन चुन्नू पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था। वह खेलने की जल्दी में मम्मी की बात पर ध्यान नहीं देता और नंगे पैर मैदान की ओर दौड़ जाता। नतीजा यह होता कि अक्सर कांच के टुकड़े या लोहे की कतरन उसके पैरों को जख्मी बना देते।
शाम को चुन्नू की मौसी लखनऊ से आई। चुन्नू को अपनी मौसी से विशेष लगाव था। मौसी बहुत बातूनी थी और रात को चुन्नू को अच्छी कहानियां सुनाया करती थी।
चुन्नू के पैर में पट्टी बंधी देखकर उन्होंने चुन्नू की मम्मी से चोट का कारण पूछा। मम्मी ने सारी बात मौसी को बताई और कहा कि वह हर तरह से चुन्नू को समझाने में असफल रही हैं कि बगैर जूते पहने बाहर नहीं घूमा करे।
रात को जब वह मौसी के पास कहानी सुनने आया तो उसकी मौसी ने कहा कि आज वे एक ऐसे लड़के की कहानी सुनाएंगीं जिसके पैर अपनी गलतियों के कारण लोहे के बन गए थे। चुन्नू आश्चर्य से अपनी मौसी की ओर देखने लगा।
मौसी ने कहानी सुनाना शुरू की- 'एक लड़का बड़ा शैतान था। अपनी मां की बातों पर अमल नहीं करता था।उसकी मां उसे समझाती की सड़कों पर नंगे पैर ना घूमें मगर वह मां की हिदायत टाल देता।
नंगे पैर घूमने की वजह से कभी कांच के टुकड़े तो कभी पत्थर या लोहे की कील चुभ जाया करती मगर वह परवाह नहीं करता। कुछ दिनों बाद उसके पैरों में कठोरता आने लगी। धीरे-धीरे कठोरता बढ़ती ही गई। एक दिन उसने महसूस किया कि उसके पैर के पंजे लोहे के बन गए हैं।
चुन्नू बड़े ध्यान से कहानी सुन रहा था। कहानी उसको अपनी लग रही थी। इसलिए उसकी उत्सुकता भी बहुत बढ़ गई थी। वह सोच रहा था कि काश उसके पैर भी लोहे के हो जाएं तो उसे किसी भी बात की परवाह न रहे। जूते चप्पल पहनने की जरूरत ही नहीं रहे।
चुन्नू की मौसी ने कहानी आगे बढ़ाई। 'लोहे के पंजे पाकर पहले तो वह लड़का बहुत खुश हुआ मगर धीरे-धीरे उसके लिए परेशानी बढ़ गई। भारी-भरकम पंजे उठाते उठाते उसकी टांगे दुखने लगती। उसके दोस्त उसे लोहे की टांगों वाला दानव बच्चा कहकर चिढ़ाने लगे।
एक दिन उस लड़के के पंजे ऐसे चुंबक के संपर्क में आ गए कि उसके पंजों में भी चुंबकत्व आ गया। अब उसके पंजों के संपर्क में जो भी लोहे की चीज आती वह चिपक जाती। जहां जहां वह जाता लोहे की कीलें, ब्लेड, वगैरह चिपक कर उसके साथ घिसटती जाती।
मौसी की कहानी अभी इतनी ही हुई थी कि चुन्नू की घबराहट बढ़ने लगी। इसी घबराहट में उसको नींद आ गई। सपने में भी उसे उसी लड़के की कहानी दिखती रही।
उसे लगा जैसे कहानी वाला लड़का और कोई नहीं स्वयं वही हो। अगर सचमुच ऐसा हो गया तो? उसके पैरों में अगर सारे मोहल्ले का कचरा चिपकता रहा तो? धीरे-धीरे वह इतना भारी हो जाएगा कि उसका एक कदम भी आगे बढ़ना मुश्किल होगा।
अचानक वह चिल्ला पड़ा 'नहीं नहीं'। उसकी नींद खुल गई थी।सुबह हो चुकी थी। रसोई घर में मम्मी चाय बना रही थी। वह दौड़ता हुआ मम्मी के पास पहुंचा और बोला 'मम्मी मैं अब कभी नंगे पैर बाहर नहीं निकलूंगा।'
चुन्नू की मौसी दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी। उन्होंने बहुत ही बुद्धिमानी से चुन्नू को सबक सिखा दिया था। फिर चुन्नू को कभी नंगे पैर घूमते खेलते नहीं देखा गया।
ब्रजेश
कानूनगो
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